Junoon - 1 in Hindi Thriller by Nehal Jain books and stories PDF | जुनून - 1

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जुनून - 1

चारो तरफ देखो तो रेगिस्तान की रैत ही रैत दिख रही है। इंसान को लू लगा देने वाली तेजी से चलती हुई गरम हवाएं एक समन्दर को नागफनी से नीचे गिरा देती है। आसमान में गिद्ध का झुंड गोल-गोल चक्कर लगा रहा है- तभी तेजी से दौड़ती हुई एक 20-21 साल की लड़की किसी से बच के भाग रही है। और उसके पीछे उसी की उम्र के भगवा रंग का गमछा पहने दो जवान लड़के उसे पकड़ने के लिए भाग रहे हैं।

"ऐ रुक लड़की, रुक", पहला लड़का कहता है

"ऐ रुक लड़की, साली कहां तक ​​भागेगी", दूसरा लड़का कहता है

थोड़ी दूर तक भागने पर वो लड़की रुकती है और पीछे मुड़ कर, अपने हाथों में रेत लेकर उन दोनों की तरफ उछालती है। उस रेत से उन दोनों की आँखे जलने लगती है, तो वे दोनों पास ही के पतझड़ित पेड़ पर सहारा लेके बैठ जाते हैं और अपनी आंखें मसलने लगते हैं। उस चीज़ का फायदा उठाते हुए वह वहा से और ज्यादा तेजी भाग जाती हैं।

"ऐ लड़की, रुक", पहला लड़का कहता है

"हमारी आखों में धूल उछालती है , तेरी हिम्मत कैसे हो गयी। रुक रांड कही की"

इससे हमें पता चलता है की वह एक वैश्या है जो अपने मालिक से दूर भागने की कोशिश कर रही हैं। और थोड़ी ही दूर जाने पर उसे एक कच्चा मकान दिखता हैं। जिसके बाहर एक हटा-कटा 53-55 साल का अधेड़ उम्र आदमी अपने हाथ धो रहा हैं।

वह कुछ समय के लिए तो रेगिस्तान के बीचो बीच एक कच्चा मकान और उसमै रेह रहै आदमी को देख कर चोंक जाती है पर बाद मै यह बात भूलकर आगे बढ़ती है, जब वह आदमी आपने हाथ धो रहा था तब पीछे से उसके माकन मै घुस जाती है। और रेगिस्तान के बीच मै होने के बावजूद घर मैं इतनी सफाई देख कर फ़िर से चौंक जाती है। 

और एक जंग लगे हुए बक्से और पलंग पे पीछे वाली जगह पर जाके छुप जाती है, और वह उस को देखती है- वह आदमी करीब 7 से 8 बार अपने हाथो को लोटे से धो रहा था। 
तभी वह दोनों लड़के उस कच्चे माकन को देख कर उसके पास जाने लगते है। और उस आदमी को अनदेखा कर दरवाज़े से मकान के अंदर घुसने लगते है। तभी वह आदमी मूड कर बोलता है -

"ऐ तुम दोनों ऐसे कहा मेरे घर मै घुसे चले जा रहे हो"

"हम दोनों एक लड़की का पीछा कर रहे है वह पक्का यहाँ आयी है" पहला लड़का बोला

आदमी बोला "इस रेतीले रेगिस्तान मै कोई नहीं आता, किसकी बात कर रहे हो तुम।"

"अरे बा जिसको आप छुपा रहे हो वह एक रांड है" पहला लड़का बोला

"उसे हम उसकी सही जगा पर ले जाने आये हैं।" दूसरा लड़का बोला

आदमी बोला "यहाँ पर कोई नहीं आया है, इधर से चलते बनो वरना कान के नीचे एक लगाऊंगा।" और अपना एक हाथ उनकी तरफ उन्हें डरने के लिए उठाता है। तभी वह दोनों लड़के उस हटे-कटे आदमी को देख कर भाग जाते हैं।

फ़िर वह आदमी दरवाज़े से घर मैं जाता है-

"अब्ब तुम यहाँ से चली जाओ वो वापिस नहीं आएंगे"

वह लड़की बक्से और पलंग के पीछे वाली जगह से निकल कर डरी हुई सेहमी हुई बहार को आती है। और दरवाज़े से बहार निकलती है।और पीछे मुड कर उससे कहती है-

"मैं यहाँ पे इसलिए नहीं छुप सकती क्योंकि मै एक रांड हूँ। मै अपनी मर्ज़ी से रांड नहीं बनी, मेरे माँ-बाप ने मुझे इन जल्लादों के पास बेच दिया था।"

आदमी थोड़ी देर तक उसे घूरता है फिर वह पास मै पड़ी कुर्सी पे बैठ जाता है। और पास पढ़े रेडियो को चालू करके उसे किसी कपडे से साफ़ करते करते सुनने लगता है।

TO BE CONTINUED.....